Skip to main content

THE DIFFERENCE IN MENTALITY

MENTALITY

Mentality is your way of thinking, it decides what kind of a person you are because you become a good person through a good mentality and you become a bad person through a bad mindset.

Have you ever thought about what difference mentality could make, if not, then it's here.

" Think how a lion could be the king of the jungle

 If he's not the biggest, the elephant is.

 He cannot be the fastest because it's the cheetah

He also cannot be the smartest

So, if he's not the biggest, the smartest  or the fastest

Then how he can be the king of the jungle.

HIS MENTALITY is what that the answer turns out to be.

Thats the only difference between a lion and an elephant 

When a lion sees an elephant he thinks lunch 

And when an elephant sees a lion he thinks run." 

 







                                         

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

जीवन का नज़रिया

जीवन का नज़रिया यह दुनिया कितनी खूबसूरत है,  पर हमारी नजरों में तो सिर्फ इसकी बुरी ही सूरत है ।  अगर इसको ध्यान से देखो तो चांद सितारे भी  नज़र  आते हैं,    लेकिन अगर इसको नजरअंदाज करो तो  सिर्फ  बुरे लोग, बुरी बातें,  बुरे   शहर ही   देखने को   रह  जाते हैं ।   यह दुनिया गोल है जो करते हो वो लौट कर जरूर आता है , अगर कर्म अच्छे करो तो मनुष्य एवं पूरा संसार उसका अच्छा ही फल पाता है ।   खिड़कियां तो सिर्फ दुनिया को बंद कमरों से देखने का साधन है,  लेकिन अगर मन की आंखों से देखो तो पूरा संसार खुला, हरा-भरा, और खूबसूरत  नज़र  आता है ।   कंघी  से तो सिर्फ  आप अपने बाल संवार सकते हो,  परंतु मेहनत से पूरा जीवन और इस दुनिया को देखने का   नज़रिया  भी संवर जाता है ।  पानी की एक बूंद में एक मच्छर पनप   जाता है, कोशिश करो तो आधा अधूरा जीवन भी पूरा नजर आता है ।

अपने किसी प्यारे को खो ना देना

  अपने किसी प्यारे को खो ना देना                                            सोच, अच्छी हो तो ही फायदा है क्योंकि जिंदगी   बिखर सकती है । सच, दरवाजे के उस पार की दुनिया है   जो हर किसी को  दिखती नहीं है ,   पर ध्यान से देखो तो   छिपती   नहीं है ।   इसके दूसरे पहलू झूठ से रिश्ते टूटते ही है , इंसान , लोग , भरोसा   फिर   मिलते नहीं हैं । असर   इसका स्थाई होता है भूल ना पाओगे , नाते और कोई बनाना पाओगे । ध्यान रखो अपने किसी प्यारे को खो ना देना वरना खुद को   खो   दोगे ।  

इंसानियत

इंसानियत मनुष्य कहने को तो सबसे होशियार प्रजाति है परंतु इसको शक्तिशाली चरित्र की परिभाषा नहीं आती है  हमारे पास रंग है किंतु आज तक हमने किसी की जिंदगी रंगीन नहीं  बनाया लगता है मनुष्य मानवता को भूल  रहे  हैं और मोह माया के ख्यालों में झूल रहे हैं  कुत्ते जैसे जानवर वफादार और मनुष्य बेकार हो रहे हैं  हे मनुष्य लगता है हम इंसानियत को भूल रहे हैं