इंसानियत मनुष्य कहने को तो सबसे होशियार प्रजाति है परंतु इसको शक्तिशाली चरित्र की परिभाषा नहीं आती है हमारे पास रंग है किंतु आज तक हमने किसी की जिंदगी रंगीन नहीं बनाया लगता है मनुष्य मानवता को भूल रहे हैं और मोह माया के ख्यालों में झूल रहे हैं कुत्ते जैसे जानवर वफादार और मनुष्य बेकार हो रहे हैं हे मनुष्य लगता है हम इंसानियत को भूल रहे हैं