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इंसानियत

इंसानियत

मनुष्य कहने को तो सबसे होशियार प्रजाति है परंतु इसको शक्तिशाली चरित्र की परिभाषा नहीं आती है

 हमारे पास रंग है किंतु आज तक हमने किसी की जिंदगी रंगीन नहीं बनाया

लगता है मनुष्य मानवता को भूल रहे हैं और मोह माया के ख्यालों में झूल रहे हैं 

कुत्ते जैसे जानवर वफादार और मनुष्य बेकार हो रहे हैं 

हे मनुष्य लगता है हम इंसानियत को भूल रहे हैं

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जीवन का नज़रिया

जीवन का नज़रिया यह दुनिया कितनी खूबसूरत है,  पर हमारी नजरों में तो सिर्फ इसकी बुरी ही सूरत है ।  अगर इसको ध्यान से देखो तो चांद सितारे भी  नज़र  आते हैं,    लेकिन अगर इसको नजरअंदाज करो तो  सिर्फ  बुरे लोग, बुरी बातें,  बुरे   शहर ही   देखने को   रह  जाते हैं ।   यह दुनिया गोल है जो करते हो वो लौट कर जरूर आता है , अगर कर्म अच्छे करो तो मनुष्य एवं पूरा संसार उसका अच्छा ही फल पाता है ।   खिड़कियां तो सिर्फ दुनिया को बंद कमरों से देखने का साधन है,  लेकिन अगर मन की आंखों से देखो तो पूरा संसार खुला, हरा-भरा, और खूबसूरत  नज़र  आता है ।   कंघी  से तो सिर्फ  आप अपने बाल संवार सकते हो,  परंतु मेहनत से पूरा जीवन और इस दुनिया को देखने का   नज़रिया  भी संवर जाता है ।  पानी की एक बूंद में एक मच्छर पनप   जाता है, कोशिश करो तो आधा अधूरा जीवन भी पूरा नजर आता है ।

अपने किसी प्यारे को खो ना देना

  अपने किसी प्यारे को खो ना देना                                            सोच, अच्छी हो तो ही फायदा है क्योंकि जिंदगी   बिखर सकती है । सच, दरवाजे के उस पार की दुनिया है   जो हर किसी को  दिखती नहीं है ,   पर ध्यान से देखो तो   छिपती   नहीं है ।   इसके दूसरे पहलू झूठ से रिश्ते टूटते ही है , इंसान , लोग , भरोसा   फिर   मिलते नहीं हैं । असर   इसका स्थाई होता है भूल ना पाओगे , नाते और कोई बनाना पाओगे । ध्यान रखो अपने किसी प्यारे को खो ना देना वरना खुद को   खो   दोगे ।